Sunday, January 30, 2011

समाज

समाज

सिना फौलादी है
बाजुओं में ताकत है
जुबान में हिम्मत है
फिर भी
 चौंक कर
क्या करोगे
यह जानकर कि
तुम
बहुत बौने हो
बात नहीं करोगे कि
तुम्हारे पास
शब्द कम है
कब तलक
शर्म करोगे कि
तुम
बहुत बौने हो
तुम
बोलना नहीं चाहते
क्योंकि
तुम
बहुत बौने हो
राष्ट्र को गर्व है
वर्ग को तुम्हारे नाम से
जाना जाने लगा है
फिर भी
छुपे रहोगे घरों की चहारदीवारियों के बीच
क्योंकि तुम
बहुत बौने हो...।
 

Saturday, January 29, 2011

विकास तो बच्चा है जी

विकास तो बच्चा है जी

सुरेश समाज का एक ऐसा पात्र है जिसने कभी स्कूल का रुख नहीं किया। उम्र के नौवें पड़ाव पर भी वह खुले बदन सड़कों पर गिल्ली-डंडा खेल रहा है। बस सर जी, यही शब्द है उसके कोष में। आते-जाते हर वक्त पूछता है- सर जी कहां जा रहे हैं बाजार। क्या खाये सर जी। आफिस जा रहे हैं। उसकी पांच वर्षीय बहन है मुन्नी। और उससे छोटी है एक नन्की। उम्र करीब दो साल। हर समय अपने भाई या बहन के गोद में लिपटी रहती है। तीनों कालनी के मुंहाने पर एक झोपड़ी में रहते हैं। कालनी के आलीशान मकानों में जब शाम को रोशनी जलती है उसका झोपड़ अंधेरे में नहा उठता है। देर शाम बापू आते हैं काम से लौटकर, दारू पीकर। रेडियो जरूर उसकी झोपड़ी में है जो कभी-कभी रात को बजती है जब बापू मूड में होते हैं। मां दिनभर काम-काज कर बच्चों को पालती है। सुरेश उसी झोपड़ी के आगे चापाकल के सामने बैठा मिलता है। अक्सर नहाते या खेलते। प्रदेश में विकास दिख रहा लोगों को। बड़े-बड़े निवेशकों को यहां इस प्रदेश में वो सबकुछ दिखाई पड़ रहा है जो आज तक किसी प्रदेश में दिखा ही नहीं। सो, चारों तरफ सुशासन, विकास की ही बात हो रही है। पर विकास यहां उस नामचीन कलाकार एके हंगल की तरह है जो लाचार, बिस्तर पर रेंगता दिखता है। विकास कहां है। उस
झोपड़ी में सो रहे सुरेश तक कौन पहुंचायेगा विकास की किताब। कौन उसे स्कूल का रास्ता दिखायेगा। शायद
कोई नहीं। किसी के पास समय कहां है सुरेश, मुन्नी और नन्की के बारे में सोचने की। और एक सुरेश है। उसकी आत्मसंतुष्टि देखिये। दीपावली के महज दो दिन बचे थे। उसकी मुन्नी भी मुझे देखते ही अब बड़े भाई की नकल करते पूछती है, सर जी कहां जा रहे हैं। कभी-कभी मुस्कुराती है फौजी स्टाइल में सलाम करती है। एक दिन पटाखा खरीदने के लिये पैसे मांगती है-सर जी कुछ पैसे दो ना। अस्पष्ट भाषा होने के कारण मैं पीछे मुड़कर पूछता हूं-क्या कहा। सुरेश तपाक से कहता है नहीं सर जी कुछ नहीं, आप जाइये और अपनी छोटी प्यारी मुन्नी को डांटता है सर जी से पैसा मांगती है। अब जब भी मुन्नी देखती है उसके चेहरे पर सिर्फ दर्द है। सिर्फ सलाम करती है, हंसती है। उस हंसी के पीछे का मर्म वो दर्द, पीड़ा विकास से दूर है। विकास की राह उसकी झोपड़ी तक नहीं पहुंचती। अक्षर की दुनिया से दूर सरकार के पास अखबारों में बयान देने से फुर्सत कहां। हाकिम हैं फाइलों से निकलने, बाहर झांकने की जरूरत कहां। मुन्नी, सुरेश नन्की क्या कभी क,ख,ग, की दुनिया से बाबस्त हो पायेंगे। शायद नहीं। योजनायें कई हैं सरकार के पास। लोगों ने जमकर पिछले चुनाव में नीतीश सरकार को समर्थन दिया। अखबार वालों, चैनलों ने विकास को सरजमीं पर उतरते देखा, सराहा। पर आज सुरेश एक प्रश्न लेकर खड़ा है अपने झोपड़ी के बाहर। लोगों के पास विकल्प क्या था? लालू का आतंक, साधु की दादागिरी देखने की हिम्मत उनमें थी नहीं। पंद्रह वर्षों का विकृत चेहरा सामने था। कांग्रेस का हाथ आम लोगों से काफी दूर। ऐसे में उस जंगलराज से बेहतर यह हवा-हवाई बातें ही सही। विकास होगा। इसी उम्मीद, विश्वास में सुरेश भी हर सुबह झोपड़ी से बाहर निकलता है। सुबह-सवेरे बच्चों को भारी बस्ता लादे, बस की इंतजार में खड़े, स्कूल जाते देख पूछता है- विकास तो अभी बच्चा है ना सर जी। मुन्नी कहती है अभी हम बच्चे हैं विकास होगा तो बापू हमें दारू पीकर पीट-पाट नहीं करेंगे। मइया से झगड़ेंगे नहीं। हाल ही में सुरेश की मां घर छोडऩे की धमकी दे रही थी। वह पति पर दबाव दे रही थी अब तो पन्नी पीना बंद करो। बदले में पति ने पूरे घर को तहस-नहस कर दिया। यह भी नहीं सोचा कि उसकी पत्नी फिर मां बनने वाली है। आखिर यह दोष उस पन्नी की है जिसे सरकार ने हर चौराहे पर बेचने की खुलेआम इजाजत दे रखी है। सुरेश हर रोज खाली पन्नी को बापू के सिरहाने से उठाकर फेंकता है। मुन्नी भी खुले बदन नन्की को गोद में लिये घूमती रहती है। विकास होगा तो उसे भी तन ढकने को कुछ मिल जाये शायद। खुले बदन को छुपाती वह हर रोज बड़ी हो रही है लेकिन अपना विकास तो अभी बच्चा है जी। सुरेश फिर उसी झोपड़ी के बाहर खड़ा है। मुन्नी पूछती है- भइया ये विकास किसका नाम है?

Friday, January 28, 2011

सच को मत बिकने दो

सच को मत बिकने दो
सबसे ताकतवर तंत्र को क्या हो गया है। न्याय-अन्याय के ताने-बाने सिकुड़ते जा रहे हैं। उस तंत्र पर गण का भरोसा शायद हमें,आपको, हम सबको नहीं रहा। हक में फैसला मिलने का यकीन नामुमकिन सा दिखता है। इसके बाद न्याय के तमाम रास्ते बंद, खत्म से दिखते हैं। न्यायपालिका। क्या आप इस तंत्र को आज भी न्याय के भरोसेमंद मानते हैं या उस वटवृक्ष में पलता-बढ़ता पुष्पित होते देख रहे हैं जो खोखला, भ्रष्ट हो चुकने की स्थिति में
लकवाग्रस्त हो चुका है। या फिर उस दल-दल पथ पर अगुवा बना बैठा है जिस होकर पाप व पुण्य का फैसला
संभव नहीं। न्याय देने वाले हाथ गिरवी पड़ रहे हैं। काला कोट वाले तराजू पर इंसाफ को तौल रहे हैं। जहां आम आदमी के लिये इंसाफ की देवी को कलंकित, अमर्यादित करने से भी वे नहीं हिचकते। जिन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिये समाज के मुंशी बने हैं और उत्सव जैसा होनहार यंग पढ़े-लिखे नौजवान को खंजर उठाने की जरूरत आन पड़ती है। यानी इस मर्यादित सिस्टम में भी छेद साफ, चौड़ा हो गया है। खगोल विज्ञान के महारथी जल्द ही रात में भी धरती से दूसरा सूरज उगाने की तैयारी में हैं। इसी साल आकाश में प्रकाश का ऐसा गजब नजारा दिखेगा जिससे आपको रात में सूर्य की रोशनी नजर आयेगी। पर यहां न्याय का विहान कब होगा। हम आज वहां खड़े हैं वहां कातिल को मुंसिफ बनाने की तैयारी हो रही है। दुर्भाग्य है। जहां न्यायपालिका से भी लोग ना उम्मीद हो उठे हों। उस समाज, देश का क्या होगा सोचनीय है। यहां इस मुल्क का कानून मंत्री ही स्वयं बोफर्स मामले में क्वात्रोच्चि के बैंक खाते से रोक हटाने का मार्ग प्रशस्त करने की पहल करता दिखे और आम गण न्यायपालिका से रहम, न्याय की भीख मांगता खड़ा हो। इतना ही नहीं, वह आम आदमी अपना सब कुछ देने को तैयार बैठा हो बस बदले में शर्त इतनी कि न्याय जल्द दे दो। जल्द न्याय पाने के लिये भारत की सबसे महत्वपूर्ण खुफिया एजेंसी की पूर्व महिला अधिकारी निशा प्रिया भाटिया हाई कोर्ट में कपड़े उतारने को विवश दिखती है। अर्धनग्न हो जाती है उस इंसाफ की मंदिर में जहां से वह निराश हो चुकी है और बदले में उसे उस वक्त भी क्या मिलता है सिर्फ एक और कलंक। उसपर मानसिक संतुलन खा देने का आरोप। वाह रे सिस्टम। पुणे के एक 60 वर्षीय बुजुर्ग व्यापारी तिकोठकर जमीनी विवाद में कोर्ट का चक्कर लगाते इतने थक गये कि आखिकार उन्होंने हाईकोर्ट को बीस हजार रुपये का चेक यह मनुहार लगाते भेज दिया कि रुपये ले लो पर तारीख मत दो। तिकोठकर जज को ई-मेल भी करते हैं कि मेरे मामले का जल्द निबटारा हो। आखिर इस मजबूत तंत्र को हो क्या रहा  है। जिस देश में राज्यपाल के आदेश के बाद मुख्यमंत्री पर अभियोजन की अनुमति मिले और पूरा विधायिका ही राज्यपाल की भूमिका पर सवाल दागने लगे। पक्ष-विपक्ष एकदम आमने-सामने दिखे। जहां फैसला आने से पहले पूरे न्याय संगत सिस्टम को मैनेज कर लिया जाये। भला उस देश के बारे में सोचिये जहां अजमल कसाब के लिये तो मनमाफिक वकील कोर्ट में उसे नाबालिग ठहराने पर अडिग खड़ा हो लेकिन रूपम पाठक के वकील को धमकी मिले। रूपम का केस लडऩे को कोई काला कोट तैयार न दिखे। ये न्यायपालिका के सामने कशककश क्यों? आरूषि-हेमराज मर्डर में पिता डा. राजेश तलवार हों या रूचिका हत्याकांड का वह राठौर दोनों पर खंजर चलाने वाला उत्सव क्या समाज का वह आईना नहीं है जो हम सबों के सामने न्यायपालिका का असली चेहरा परोस रहा है। उत्सव की भावना को पूरा देश समझ रहा है। उसकी सोच, मंशा, इशारे को सभी समझ रहे हैं। शायद वो न्याय देने वाले भी जो उसे काल कोठरी में भेजने का फरमान बार-बार देने को विवश हो रहे हैं। क्या न्याय देने वाले नहीं समझ रहे कि उनकी जेब में गांधी गरम हो रहे हैं या फिर चंद सुर-सुरी  के आगे उनकी आंखें आज लोअर से लेकर सर्वोच्च न्याय के मंदिर तक इंसाफ की देवी की मानिंद आंख पर पट्टी बांध बैठ गये हैं जहां से वही दिखता है जिसे पूरी दुनिया सह-स्वीकार नहीं कर सकती। सच जहां खुलेआम बिकने को मजबूर बैठा हो और झूठ शान से दुष्शासन बन उत्सव जैसे भविष्य को छलनी करने पर आमादा हो उस तंत्र से ना उम्मीद होना स्वभाविक।

Friday, January 21, 2011

चुम्मा चट-चट महा मेगा शो

चुम्मा चट-चट महा मेगा शो
आज रात नौ बजे। कहीं जाइयेगा मत। सिर्फ मी टीवी पर। नहीं-नहीं सिर्फ बी टीवी पर। नहीं भाई कहा ना सिर्फ सी टीवी पर। एक्सक्लूसिव लाइव शो। पूरे देश में एक साथ इतना बड़ा हंगामा। दो सौ संवाददाताओं की टीम। इस महामेगा शो चुम्मा चट-चट को कवरेज करने को तैयार। चुम्मा चट-चट जरूर देखें। महान पारिवारिक मनोरंजन से भरपूर शो चुम्मा चट-चट। बच्चों को जरूर दिखायें महान ज्ञानवद्र्धक शो। खासकर जिनकी उम्र 18 से कम हो
उन्हें रातभर जगा कर दिखायें। मैं तुलसी तेरे आंगन की के बाद सबसे सुपरहिट चुम्मा चट-चट आज रात ठीक नौ बजे। सिर्फ इसी चैनल पर। इन एसोसिएशन बूथ मैन फोर्स, अनवाटेंड 72 एंड परफेक्स कैप्सूल व तेल जो दे
आपको पुरुषों सी मर्दानगी, स्त्री का समाधान, शुक्रवर्धक, धातुवर्धक, शक्तिवर्धक। पत्नी भी संतुष्ट आप भी खुश।
चुम्मा चट-चट। आज रात। नामी हीरोइनों का मेला जो उतरेंगी आपकी बेडरूम तक। आज रात। पाकिस्तान से
लेकर विदेशी माल भी आयेंगी मेरे श्रीमान्। फिर देर किस बात की। हो जाइये तैयार। हमारे चैनल पर मल्लिका है, समीरा है, हाट बिपाशा है। वीना मल्लिक के साथ अस्मित हैं चादरों में लिपटे। और तो और जलवा बिखरेने को तैयार है पावेला एंडरसन। फिर आपको चाहिये क्या। चुम्मा चट-चट में। खूब चाटेंगी दर्शकों को। दर्शक भी खूब चटायेंगे एक दम थ्री डी। पूरे लाइव शो के दौरान सिर्फ इसी चैनल पर चुम्मा चट-चट में।
                        मैंने देखा था यार, प्रोमो में। क्या खूब चुम्मा लेती है। ऐश, विद्या, करीना भी फेल। न जाने क्या-क्या करती है। जैसे कोई विदेशी चुंबन प्रतियोगिता हो। तभी लाइट आ जाती है। लोग घरों को भागने लगते हैं। सड़कें एकदम सुनसान। सभी दुकानें बंद। कहीं नौ न बज जाये। कमिंग अप चुम्मा चट-चट। टीवी पर लगातार प्रचार आ रहा है। थोड़ी देर में इस ब्रेक के बाद चुम्मा चट-चट। नौ बज चुके हैं। लोग चिपके हैं टीवी से। एंग्री यंग मैन नायक गंभीर है। तभी अनवाटेंड 72 का प्रचार। मैं अभी प्रेगनेंट नहीं होना चाहती। ऊर्फ ये प्रचार भी। खैर, नायक फिर अवतरित होता है। होठों का चुंबन बाकी है। और घरों से दर्शकों की तालियों की आवाज। तभी कैटरीना लक्स लेकर आ जाती है मेरी खूबसूरती का राज। सोने से भी सोना लगे सलोना मेरा यार। लक्स लगाओ सोने का इनाम पाओ। रूपा बनियान है तो चलो आगे। लोगों की नजर एकटक टीवी पर। कहीं बाथरूम से बिकनी में पामेला न निकल जाये यार। नये साल पर टीवी दर्शकों को मालामाल होने का मौका मिलने वाला है भाई। आइटम गर्ल याना गुप्ता कहीं गिफ्ट में मिले अधोवस्त्र में न आ जाये। ऐश्वर्या भी राज खोलने वाली है। वह बतायेगी सलमान व विवेक के उस गुप्त हिस्से का राज, जहां उनके दिमाग से लैप्टिन हारमोन सक्रिय होकर व्यक्ति में यौवनारंभ पर आक्रमण करता है। अभी तक यह बात सिर्फ शोधकर्ता ही जानते थे जिन्होंने चूहों पर यह प्रयोग किया था तो पाया कि दिमाग के हाइपोथेलमस जिसे प्रिमेमेलरी न्यूक्लियस में स्थित इस जगह को लैप्टिन हारमोन प्रभावित करता है जिससे मादा में यौवन की शुरूआत होती है। यह बात पता नहीं कैसे लीक हो गयी कि सलमान व विवेक के दिमाग में यौवनारंभ वाली जगह की खोज ऐश कर ली है। इधर, विदेशी प्रकाशक मुंहमांगी रकम लेकर ऐश के पास पहुंच चुके हैं। उधर, अनिल कपूर की 24 दिसंबर की जन्म दिन पार्टी में एक फैन अजय ने सलमान के गाल पर चुंबन दे दी। सलमान समझ गये ऐश ने खोल दिया उनका राज। आपे में उन्होंने अजय को एक झापड़-तमाचा दे मारा।
                      तभी पावन फिर कट। ओह नो। उस सीन का क्या होगा यार। जो झलकी में देखी थी। बिपाशा स्वीमिंग सूट में निकलती है प्रियंका के साथ और जान व अभिषेक निकलते हैं दोस्ताना स्टाइल में। तभी वाह रे सुशासन की सरकार। लाइट आ गयी। इठलाती, बलखाती, आंखों से शर्म उतारे, चमकती नायिका नायक के पैरों को चूमती है। फिर छाती तक पहुंचती है। माथे को चूमती है। चेहरे को हाथों से छुपाकर जाने लगती है लेकिन आज का बिग बास धर्मवीर का वह डायलाग दोहराता है-होठों का चुंबन बाकी है और बेबस नायिका बिग बास को जिंदा रखने के लिये होठों की ओर बढ़ती है। दर्शक सीटी बजाते हैं। नायक ओ मेरी मेहबूबा, मेहबूबा, मेहबूबा गाने लगता है।
             टीवी शो के एंकर मि.तोता अपने कोलकाता स्थित संवाददाता मिस किस को फोन लगाते हैं। हमारे साथ हैं कोलकाता से मिस किस। हां तो किस बतायें कोलकातावासियों की क्या राय है। दिखायेंगे, चलेंगे मुंबई व दिल्ली भी जहां से कई दर्शक हमारे साथ जुड़ गये हैं चुम्मा चट-चट में। आप कहीं जाइयेगा मत। बने रहियेगा हमारे साथ सिर्फ इसी चैनल पर महान पारिवारिक शो चुम्मा चट-चट में तब तक एक ब्रेक।       

चुम्मा चट-चट महा मेगा शो

चुम्मा चट-चट महा मेगा शो आज रात नौ बजे। कहीं जाइयेगा मत। सिर्फ मी टीवी पर। नहीं-नहीं सिर्फ बी टीवी पर। नहीं भाई कहा ना सिर्फ सी टीवी पर। एक्सक्लूसिव लाइव शो। पूरे देश में एक साथ इतना बड़ा हंगामा। दो सौ संवाददाताओं की टीम। इस महामेगा शो चुम्मा चट-चट को कवरेज करने को तैयार। चुम्मा चट-चट जरूर देखें। महान पारिवारिक मनोरंजन से भरपूर शो चुम्मा चट-चट। बच्चों को जरूर दिखायें महान ज्ञानवद्र्धक शो। खासकर जिनकी उम्र 18 से कम हो
उन्हें रातभर जगा कर दिखायें। मैं तुलसी तेरे आंगन की के बाद सबसे सुपरहिट चुम्मा चट-चट आज रात ठीक नौ बजे। सिर्फ इसी चैनल पर। इन एसोसिएशन बूथ मैन फोर्स, अनवाटेंड 72 एंड परफेक्स कैप्सूल व तेल जो दे
आपको पुरुषों सी मर्दानगी, स्त्री का समाधान, शुक्रवर्धक, धातुवर्धक, शक्तिवर्धक। पत्नी भी संतुष्ट आप भी खुश।
चुम्मा चट-चट। आज रात। नामी हीरोइनों का मेला जो उतरेंगी आपकी बेडरूम तक। आज रात। पाकिस्तान से
लेकर विदेशी माल भी आयेंगी मेरे श्रीमान्। फिर देर किस बात की। हो जाइये तैयार। हमारे चैनल पर मल्लिका है, समीरा है, हाट बिपाशा है। वीना मल्लिक के साथ अस्मित हैं चादरों में लिपटे। और तो और जलवा बिखरेने को तैयार है पावेला एंडरसन। फिर आपको चाहिये क्या। चुम्मा चट-चट में। खूब चाटेंगी दर्शकों को। दर्शक भी खूब चटायेंगे एक दम थ्री डी। पूरे लाइव शो के दौरान सिर्फ इसी चैनल पर चुम्मा चट-चट में।
                        मैंने देखा था यार, प्रोमो में। क्या खूब चुम्मा लेती है। ऐश, विद्या, करीना भी फेल। न जाने क्या-क्या करती है। जैसे कोई विदेशी चुंबन प्रतियोगिता हो। तभी लाइट आ जाती है। लोग घरों को भागने लगते हैं। सड़कें एकदम सुनसान। सभी दुकानें बंद। कहीं नौ न बज जाये। कमिंग अप चुम्मा चट-चट। टीवी पर लगातार प्रचार आ रहा है। थोड़ी देर में इस ब्रेक के बाद चुम्मा चट-चट। नौ बज चुके हैं। लोग चिपके हैं टीवी से। एंग्री यंग मैन नायक गंभीर है। तभी अनवाटेंड 72 का प्रचार। मैं अभी प्रेगनेंट नहीं होना चाहती। ऊर्फ ये प्रचार भी। खैर, नायक फिर अवतरित होता है। होठों का चुंबन बाकी है। और घरों से दर्शकों की तालियों की आवाज। तभी कैटरीना लक्स लेकर आ जाती है मेरी खूबसूरती का राज। सोने से भी सोना लगे सलोना मेरा यार। लक्स लगाओ सोने का इनाम पाओ। रूपा बनियान है तो चलो आगे। लोगों की नजर एकटक टीवी पर। कहीं बाथरूम से बिकनी में पामेला न निकल जाये यार। नये साल पर टीवी दर्शकों को मालामाल होने का मौका मिलने वाला है भाई। आइटम गर्ल याना गुप्ता कहीं गिफ्ट में मिले अधोवस्त्र में न आ जाये। ऐश्वर्या भी राज खोलने वाली है। वह बतायेगी सलमान व विवेक के उस गुप्त हिस्से का राज, जहां उनके दिमाग से लैप्टिन हारमोन सक्रिय होकर व्यक्ति में यौवनारंभ पर आक्रमण करता है। अभी तक यह बात सिर्फ शोधकर्ता ही जानते थे जिन्होंने चूहों पर यह प्रयोग किया था तो पाया कि दिमाग के हाइपोथेलमस जिसे प्रिमेमेलरी न्यूक्लियस में स्थित इस जगह को लैप्टिन हारमोन प्रभावित करता है जिससे मादा में यौवन की शुरूआत होती है। यह बात पता नहीं कैसे लीक हो गयी कि सलमान व विवेक के दिमाग में यौवनारंभ वाली जगह की खोज ऐश कर ली है। इधर, विदेशी प्रकाशक मुंहमांगी रकम लेकर ऐश के पास पहुंच चुके हैं। उधर, अनिल कपूर की 24 दिसंबर की जन्म दिन पार्टी में एक फैन अजय ने सलमान के गाल पर चुंबन दे दी। सलमान समझ गये ऐश ने खोल दिया उनका राज। आपे में उन्होंने अजय को एक झापड़-तमाचा दे मारा।
                      तभी पावन फिर कट। ओह नो। उस सीन का क्या होगा यार। जो झलकी में देखी थी। बिपाशा स्वीमिंग सूट में निकलती है प्रियंका के साथ और जान व अभिषेक निकलते हैं दोस्ताना स्टाइल में। तभी वाह रे सुशासन की सरकार। लाइट आ गयी। इठलाती, बलखाती, आंखों से शर्म उतारे, चमकती नायिका नायक के पैरों को चूमती है। फिर छाती तक पहुंचती है। माथे को चूमती है। चेहरे को हाथों से छुपाकर जाने लगती है लेकिन आज का बिग बास धर्मवीर का वह डायलाग दोहराता है-होठों का चुंबन बाकी है और बेबस नायिका बिग बास को जिंदा रखने के लिये होठों की ओर बढ़ती है। दर्शक सीटी बजाते हैं। नायक ओ मेरी मेहबूबा, मेहबूबा, मेहबूबा गाने लगता है।
             टीवी शो के एंकर मि.तोता अपने कोलकाता स्थित संवाददाता मिस किस को फोन लगाते हैं। हमारे साथ हैं कोलकाता से मिस किस। हां तो किस बतायें कोलकातावासियों की क्या राय है। दिखायेंगे, चलेंगे मुंबई व दिल्ली भी जहां से कई दर्शक हमारे साथ जुड़ गये हैं चुम्मा चट-चट में। आप कहीं जाइयेगा मत। बने रहियेगा हमारे साथ सिर्फ इसी चैनल पर महान पारिवारिक शो चुम्मा चट-चट में तब तक एक ब्रेक।       

Thursday, January 20, 2011

रावण से हार गया रामचंद्र

रावण से हार गया रामचंद्र
यह कहानी स्वास्थ्य विभाग का एक घिनौना चेहरा है। इसमें एक डाक्टर अपने मरीज से खेलता है जिंदगी तबाह कर देने वाला खेल। नकली दवाओं के सहारे शुरू होती है एक-एक बूंद खून चूस लेने का रावणी प्रपंच,जिसकी परिणति यह कि वह गरीब, बेसहारा मजदूर रही-सही पूंजी  अपनी निजी जमीन भी बेच डालता है और बदले में उसको मिलती है जिंदगी भर तिल-तिल कर मरने की सौगात। वह गंवा बैठता है अपना सबकुछ। तीन-तीन जवान बेटियां।  उन्नीस साल की शर्मिला। सत्रह की फूल तो चौदह की नीलम। सबके सब शादी के लायक। दो लड़के आठ साल का बजरंगी व पांच वर्ष का राहुल, जिन्हें देखनी है अभी पूरी दुनिया। घर में हालात से लड़ती, जूझती खुद बीमार पड़ी पत्नी गंगिया देवी। ऐसे में कौन सुने फरियाद। किससे सुनायें दरिंदगी का अफसाना। जीने के मायने उसके लिये मौन हैं। हौंसला उसके पास नहीं है। उस बेबस, लाचार, हताश मजदूर की सांसें चल रही हैं वहीं गनीमत है। उसकी जिंदगी में झांकने पर अंदर की टीस उभरती है। नाम है रामचंद्र साह। घर  बहेड़ी के सुसारी। इनकी तबीयत पिछले साल बिगड़ती है। श्री साह इलाज कराने पहुंचते हैं बहेड़ा के एक निजी नर्सिंग होम में। यहां कई दिनों तक इनका इलाज चला। जांच दर जांच होते चले गये लेकिन इनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गयी। ब्लड यूरिया व सिरम क्रिटेनाइन की जांच के बाद बहेड़ा के उस रावणी डाक्टर ने इन्हें स्लाइन चढ़ाना शुरू किया। यहां तक कि श्री साह बताते हैं कि उन्हें पानी चढ़ाने के लिये बाध्य, मजबूर किया जाता रहा और जब भी वे विरोध जताते, स्लाइन चढ़ाने से मना करते डाक्टर उन पर न सिर्फ अतिरिक्त दबाव बनाता बल्कि इन्हें किडनी खराब होने की वास्ता, धमकी देकर वह रावण कलयुगी रामचंद्र का बलात इलाज करते रहे। बाद में वहां से भारी-भरकम फीस थमा दिया गया। नहीं देने की स्थिति में उनके और रामचंद्र की बेटियों की शरीर से खून निकाल लेने की धमकी दी जाने लगी। पैसे नहीं हैं तो शरीर का खून बेच लो। रावण के मुख से ऐसा सुनकर श्री साह का कलेजा फट गया। क्या करते बेचारे रामचंद्र। नतीजा, इन्हें जमीन बेचकर व पत्नी के जेवरात को बंधक बनाकर फीस भरनी पड़ी। श्री साह बताते हैं कि नकली दवा व स्लाइन चलने के कारण इनका वजन इस बीच लगातार घटता-बढ़ता रहा। बहेड़ा के उक्त डाक्टर इन्हें बार-बार स्थानीय स्तर पर जांच कराने की नसीहत देते और बदले में इनका शारीरिक शोषण लगातार करते रहे। इस बीच फीस मिल जाने के बाद रावण को लगा कि कहीं रामचंद्र उनके चंगुल से भाग न निकले सो लिहाजा वह अपने दसमुंखी नेटवर्क का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। रामचंद्र पर उस डाक्टर ने पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिये बाध्य करने लगे। थक-हारकर रामचंद्र वहां से भागकर दरभंगा बेता स्थित एक नामी डाक्टर के पास पहुंचे। बकौल श्री साह उस डाक्टर ने इनकी जांच की और तमाम जांच करवाने के बाद रिपोर्ट में इन्हें गलत दवा के इस्तेमाल के कारण परेशानी होने की बात कही। साथ ही तत्काल आराम के लिये कुछ दवा लिखते हुये कुछ दवा जिंदगी भर के लिये दी जिससे श्री साह का वजन काफी घट गया और इन्हें आराम भी महसूस होने लगा। इस बीच जब गलत दवा देने की शिकायत श्री साह बहेड़ा के डाक्टर से करने गये तो उन्होंने गुस्से में आकर बरबाद करने की धमकी दे डाली। कहा, भाग यहां से नहीं तो तेरे पूरे परिवार को तबाह कर देंगे। घर से उठा लेने की धमकी पर भला क्या करते रामचंद्र। श्री साह जो जिंदगी से हार गये थे भला रावण से लडऩे की ताकत कहां से ला पाते। पर उन्होंने हार नहीं मानी। राम ने रावण से बदला लेने की ठान ली थी सो उन्होंने अदालत से एक वकालतन नोटिस रावण को भेजवा दी जिसमें इलाज के दौरान जुल्मों-सितम की कहानी, आर्थिक, मानसिक व शारीरिक कष्ट पहुंचाने के लिये हर्जाना देने व जमीन बेचने के लिये दबाव बनाने की शिकायत की है। श्री साह बताते हैं कि अब तो गांव में कोई मजदूरी के लिये भी नहीं बुलाता। बच्चों की परवरिश व बेटियों की शादी कैसे होगी यह भगवान ही जानें। ता उम्र दवा के लिये पैसे कहां से आयेंगे। कौन सुनेगा भला इस गरीब की बात।  इस बीच उन्होंने एसपी से भी मिलकर अपनी आपबीती सुनायी है। कहा है कि कैसे अब भी वह रावण उन्हें जान मारने की धमकी भेजवाता है। इधर, श्री साह के वकील यूएन झा कहते हैं कि इस पूरे मामले में उक्त रावण को वकालत में बेनकाब जरूर करेंगे। मगर आज रावण रामचंद्र पर भारी है। उसके पास धन है इज्जत है बंगला है कार है और रामचंद्र के पास। गरीबी के दलदल में उसकी जिंदगी से जुड़े सवाल माकूल जवाब के लिये खड़े हैं।

Tuesday, January 18, 2011

महा मेगा भूत शो खी...खी...खी...

महा मेगा भूत शो
खी...खी...खी...


चारों भूत खिखिया रहे थे। आका आजकल ब्लू मूड में हैं। कहते हैं रीना हो टीना हो जन्नत हो मीना हो कोई भी हो चलेगी। लेकिन चल यार। एक भूत चड़चड़ाया। दूसरा जोर से बुदबुदाया। चारों एक गरीब के छप्पर पर झूल रहे हैं। जैसे वीरू शोले में पानी टंकी पर बसंती के लिये सुसाइड करता दिखता है। कमीनें, तेरा खून चूसेंगे। चारों भूत गब्बर स्टाइल में फुसफुसा रहे हैं। सामने हाथ जोड़े कालिया यानी गरीबी खड़ी है। मैंने तेरा क्या बिगाड़ा भूतनाथ। मैं गरीब, लाचार जनता। पेट में एक अन्न नहीं। तन छुपाने को कुछ नहीं। भूखे बच्चे, पत्नी बीमार। मुंह में बोलती नहीं क्या कहूं सरकार। मेरे भूतनाथ। देह सूख गये हैं। फिर भी क्या मेरा खून ही सबसे सस्ता। खून चूसने का इतना ही शौक है तो जाओ न लालू, नीतीश के पास। एक चारा खाकर आराम में, दूसरे के शरीर में फिर से सत्ता का नया-नया खून। मेरे पास क्या है भूत भाई। जो घर में था सब गिरवी पड़ा है। इंदिरा आवास मांगने गया तो कहां पहले घूस दो। लौट आया खाली हाथ। और तुम भी तब से खाली-पीली मुझे ही डरा रहे हो। जाकर ललित मोदी का खून क्यूं नहीं चूसते। कलमाडी का चूसो। ना हो तो सुषमा बड़ाइक का चूसो। आईजी पीसी नटराजन तो चूसा ही अब जेल में रखकर सरकार चूस रही है तुम भी चूसो। बहुत शोषण की बात कह रही थी। नहीं हो तो बगल में रूपम पाठक मिल जायेगी। आजकल उसका भी राजहंस स्कूल पूर्णिया में बंद है। खाली बैठी है केसरी की याद में बेचारी। चूसो ना टेरेसा कैंलन को। पिछले 90 साल में सबसे कम उम्र की लड़की है जो मिस अमेरिका बनी है। पर चारों भूत भला इन बातों में कहां उलझने वाले। कुछ भी मानने को तैयार नहीं। सब नाच रहे थे, तालियां बजा रहे थे, गा रहे थे जहां चार यार मिल जाये। गरीबी ने डरते हुये पूछा-आप चारों भूत हैं और कहते खुद को यार हैं। हां, हंसते हुये चारों भूत गंभीर हो जाते हैं। ये है मेरा भाई सत्तावाद, दूसरा विपक्षवाद, तीसरा मैं प्रदेशवाद और सबसे छोटा ये समाजवाद। पर हे महानुभावों। मेरे चारों भूतवादों। क्यों मुझ जैसे गरीब के पीछे पड़े हो। क्यों नहीं जाते सट्टेबाजों, दलालों, पूंजीपतियों के पास। नहीं कुछ तो अमिताभ बच्चन के पास। बैठे-बैठे करोड़पति बना देंगे। मुझ जैसे गरीब के पास खिखिया रहे हो, डरा रहे हो। यही चाहता है मेरा आका। चारों हंसते-हंसते इमोशनल हो जाते हैं। तुम्हारा खून चूसेंगे तभी भूत बना रहूंगा। नहीं तो ये खद्दरवाले हमें चूस लेंगे। जैसे रूपम को चूसते थे। पर डरो मत। मैं तुम्हे आराम, आहिस्ता से चूसेंगे। कष्ट नहीं होने दूंगा। तुम्हें पता भी नहीं चलेगा। पता है, किसी को बताना मत, सरकारी फाइल की तरह गोपनीय बात है कि  मैं भी तुम्हारी तरह ही मजदूर था। यह रिक्शा चलाता था। वह कुली था। दिन रात मेहनत करता था। भूखे रहकर परिवार को चलाता था। और, ये हमारा छोटू। मत पूछो। लाखों घूस देकर इसे सिपाही में भर्ती कराया। ताकि समाज में यह न्याय कर सके। समाजवाद ला सके। लेकिन हम सबों के सामने ही खद्दरटोपी वाले के लाल गुर्गों ने इसकी जान ले ली। कहा साले, हमसे बड़े समाजवादी बनते हो तो ले अब गोली खा। बेटी सुनीता से जबरन हुसैनगंज के थानाप्रभारी सुशील कुमार यादव ने शादी कर ली। छह महीने तक मौज-मस्ती कर छोड़ दिया। दबंगों ने हमारी जमीन पर कब्जा जमा लिया। जो बचा हमारी जमीन का अधिग्रहण रेलवे की योजनाओं के लिये हो गया लेकिन सीओ रसीद देने को तैयार नहीं हुआ। कर्मचारी घूस मांगता था। कहता था साहेब को चाहिये। विरोध करने पर पिटाई लगी सो अलग जेल में डलवा दिया। चारों धीरे से ठहाका लगाते हैं लेकिन यह मत समझना हम इन टोपीवालों से डरते हैं। लेकिन भूत भाई। गरीबी फिर गिड़गिड़ाया। मुझे छोड़ दो ना प्लीज। भले मेरी पड़ोसी को चूस लो। क्या मस्त चीज है मेरे भाई। बिल्कुल झकास। नहीं उसे तो चूसेंगे मेरे आका। पर तुम्हें सामूहिक रूप से हम चूसेंगे-खि...खि...खि...। पर आप मत जाइयेगा कहीं। बने रहियेगा मेरे साथ। हां, डरियेगा भी मत। भूतों से हम आपको फिर मिलायेंगे। पूरी लाइव दिखायेंगे। बने रहिये हमारे साथ  महाभूत लाइव शो में खि...खि...खि...।