Friday, September 16, 2011

खाओगे दो थप्पड़


खाओगे दो थप्पड़

पोस्टेड ओन: 16 Sep, 2011 जनरल डब्बा में
गांव की एक भोली-भाली साधारण सी जिंदगी की एक औरत अचानक भंवरी हो जाती है। अंगड़ाई लेती भंवरी उस रास्ते को अख्तियार करती है जहां से पीछे मुड़कर वह पति का हाथ नहीं थाम सकती। उस अंग का समर्पण वहां से शुरू हो जाता है, जिस देह का साक्षात्कार किए बिना नेताओं की रातें नहीं कटती और तब जन्मता है एक सीडी। राजनीति का वह क्रूर खेल जिसमें फंसती है हर रोज भंवरी जैसी न जाने कितनी औरतें। शोषित, दुरूपयोग की बनती है वह वस्तु। फलसफा यह, सीडी के सामने आने से पहले भंवरी गायब, लापता हो जाती है। नेता-पुलिस, सत्ता गठजोड़ की कहानी, उस सीडी की खोज जो भंवरी के साथ ही ओझल है, खबर बनती, सुर्खियां बंटोरती,
चटकारे लेकर पढ़ी-सुनी जाने लगती है। सीडी में क्या है, क्या भंवरी जिंदा है। तमाम सवालों के जवाब ढूंढे जाने लगते हैं। आखिर, एक औरत फंसती कैसे है उस जाल में जिसकी बनावट उसकी बुनाई पुरुष मानसिकता से तैयार की गयी हो। गांव-गंवार की एक औरत अचानक रातों-रात इतनी हॉट कैसे हो जाती है। पुलिस वही है, व्यवस्था वही है, हालात यथावत हैं। वायु सेना की एक अधिकारी अंजलि गुप्ता खुदकुशी को सुरक्षित मानती है। उसके संबंध ग्रुप कैप्टन अमित गुप्ता से क्या थे, इसकी तलाश अब हो रही है जब अंजलि कुछ भी देखने को तैयार नहीं है। अमित निलंबित किए जाते हैं, बात तो वही हो गयी। दुष्कर्म की सजा सिर्फ दो थप्पड़। ये कहां का इंसाफ है। अमरोहा में एक महिला के साथ दुष्कर्म होने पर परिजन उसे कोतवाली ले जाना चाहते हैं लेकिन गांव के लोग पंचायत बैठाते हैं और सजा, दुष्कर्मी को सिर्फ दो थप्पड़। लूट लो पूरी औरत जाति को और खा लो आराम से दो थप्पड़। अपना जाता क्या है। कानून तो यही है, कसाब के वकीलों को फीस मिलने का इंतजार है। अफजल के लिए जम्मू-कश्मीर विधान सभा ने फांसी की सजा माफ करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। अरे, जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री ही इश्किया हो, वहां न्याय, इंसाफ की बात, उम्मीद करते हो। गनीमत है, जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान के हाथों अब तक गिरवी नहीं है, नहीं तो वैसा सीएम जिसे तलाकशुदा टीवी एंकर पसंद हो, जिसे दो बच्चे और पत्नी की फिकर नहीं हो उसे प्रदेश के बारे में सोचने, समझने की फुर्सत तलाशने को कहते हो। साफ है, घर से लेकर बाहरी दुनिया तक औरतें आज कहीं भी महफूज नहीं है। थ्री स्टार अधिकारी शाहिदा बादशाह को पाकिस्तान में पसंद नहीं किया जा रहा, क्योंकि वह औरत है। कट्टरपंथी शाहिदा की तरक्की का विरोध कर रहे हैं। खिलाफत, आक्रोश तो कश्मीरी औरतें भी जता रही हैं लेकिन दहशतगर्दों के खिलाफ। अठमुकाम से सालखला तक चार किमी पैदल मार्च निकालती महिलाएं नियंत्रण रेखा पर शांति चाहती है। यह सही, कितना उचित कदम है। कम से कम वह मर्दों से पंजा लड़ाने की ताकत हासिल कर रही हैं उस अमन, शांति, भाईचारे के लिए जो आम-आवाम की जरूरत है। अठमुकाम की महिलाएं बेशमी मोरचा की पैरोकार तो नहीं हैं जो मर्दवादी वुल्फ मार्च का विरोध करती या बेशर्मी का मुकाबला बेशर्मी से ही देने पर आमादा हो या उसे ही मुक्ति की राह समझें। कानून भी रूपम पाठक के खिलाफ है। सीबीआई की विशेष अदालत शिक्षा की लौ जलाने वाली रूपम को विधायक केसरी की हत्या में सजा देने की तैयारी में है। सजा किसे हो, सजा का हकदार कौन है, कानून किसके लिए है। उन नेताओं के लिए, जो आतंक पालते हैं, जो खुद बड़े आतंकी हैं, जो स्विस बैंक में धास उपजा रहे हैं। हर दिन काटो, हर दिन पानी दो। हॉकी खिलाडिय़ों के पांवों में एक अदद अंतरराष्ट्रीय जूते नहीं और क्रिकेटरों के खाते स्विस बैंक में लहलहा रहे हैं। बेनजीर की किताब का पाठ लोग चाव से कर रहे हैं। किससे प्रेम करती थी बेनजीर इस रहस्य को जानने लोग बार-बार पूर्व की बेटी को पढ़ रहे हैं। बसपा विधायक पुरुषोतम द्विवेदी पर 17 वर्षीय दलित लड़की के दुष्कर्म मामले में एक महिला सरकार ही लीपा-पोती में जुटी है। आखिर दलित महिलाओं के सिर पर से मैले की टोकरी कब हटेगी। ऐशबाग इलाके में मैला ढोने पर मजबूर, पीड़ा दायक अनुभव को बांटने वाला कोई है। नगालैंड में स्त्रियों का पुरुषों से अधिक पढ़ा-लिखा होना भी बाधक बन रहा है। नतीजा, आज भी स्त्री विमर्श वहीं है जहां धृतराष्ट्र व गंधारी के समय महिलाएं थी। उस वक्त भी कन्याओं के अपहरण होते थे, ऋषि पराशर भी कामांध होकर फिसल जाते थे, आज बाबा रामदेव से राखी सावंत शादी करना चाह रही हैं। वक्त वहीं, हालात वहीं, सोच वही, तो नियति भी वही। औरतों का हर रोज भंवरी बनना जारी है। बस इंतजार है उस सीडी का जिसे हम और आप बैठकर देखेंगे, इसके लिए दो थप्पड़ खाना भी पड़े तो फरक कहां।

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Raj Aryan के द्वारा
September 16, 2011
good one sir:)like it:)
    manoranjanthakur के द्वारा
    September 16, 2011
    thanks a lot rajji

Thursday, June 2, 2011

यौन हमले की तैयारी में तीस मार खां


यौन हमले की तैयारी में तीस मार खां

पोस्टेड ओन: May,18 2011 जनरल डब्बा में
वालीबुड फिल्मों को और क्या चाहिये। कम बोलो ज्यादा खुलो। यही हाल रियालटी शो के भी हैं। बिग बॉस को खुश रखो और अस्मित व वीणा की तरह चादर लपेटे रहो। देखो, कितने आफर आते हैं तुम्हारे पास। निर्माता-निदेशक लाइन लगाये रहेंगे। न्योता ही न्योता। अब स्लमडॉग मिलियनेयर से हालीबुड पहुंची भारतीय अभिनेत्री फ्रीडा पिंटो को सफलता चाहिये थी। नेम एंड फेम चाहिये था सो खुल गयी। शार्टकट अपनाया और तीन सौ फिल्म देने वाले निर्माता ने उसे थ्री डी स्टाइल में न्यूड कर दिया। इम्मोर्टल्स में उसे न्यूड व सेक्स सींस दिलाकर फिल्म का प्रोमो बना डाला। सफलता तय। यानी, सफल होना हो तो पहले विवादित बनो। खुलो। कपड़े उतारो। कुछ हॉट सीन दो। कुछ लिखो कुछ सुनाओ। आईपीएल पार्टी के दौरान क्या-क्या होता है। बड़ी-बड़ी पार्टियों में महिलायें कम कपड़ों में क्या करने आती हैं। पेज थ्री से आगे अब नया क्या है। लोग पूछ रहे हैं चीयरलीडर गैव्रिएला पास्कलोट्टो से, आगे क्या लिखेंगी। भला उसके पास लिखने को बचा क्या। वह तो आईपीएल गर्ल के तौर पर भारत रवानगी से पहले ही तय कर चुकी थी कि उसे क्या लिखना है। किस हद तक विवादित होना है। सो, शार्टकट अपनाया, लिखा और चली गयी। अब तो समय उसके खुलने का है। अफ्रीका जाने के क्रम में कॉफी पीने के लिये उसके पास पैसे नहीं थे। अब करण जौहर के साथ कॉफी की चुस्की लेगी। लोगों के सामने खुलेगी। एक भारतीय ने सीमा पर घुसपैठ कर रहे एक पाकिस्तानी से पूछा-ये अमेरिका को कैसे पता चल गया लादेन एबटाबाद में छुपा है। उस सज्जन ने कहा, अमेरिका के पास आधुनिक यंत्र है, तंत्र है, तकनीक है, सुविधा है जिससे वो व्हाइट हाउस में बैठे ही गलियों से लेकर बाजारों तक। नुक्कड़ से लेकर चौराहों तक। बड़े-बड़े आलीशान बंगलों, होटलों से लेकर झुग्गी-झोपडिय़ों तक। बच्चों के स्कूल बैग से लेकर किचन तक । घर-घर के कमरों तक में हो रही गतिविधियों को वो लाइव देख सकता है। बस, क्या था। भारतीय ने उस दिन से बाथरूम जाना छोड़ दिया। नहाना भूल गया। बीवी के साथ सोना भी बंद। क्या पता, अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा सब-कुछ देख रहा हो। भारतीय को पाकिस्तानी की बात में दम दिखा। उसे लगा यही वजह है, अमेरिकी अदालत ने आइएमएफ प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस कान को जमानत नहीं दी। उसे जेल भेज दिया। आखिर, कान को तो अमेरिका पहले ही नंगे नहाते देख लिया था और जब बारी मैनहट््टन के होटल के उस कमरे में सफाई करने गयी महिला कर्मचारी पर उसने यौन हमला कर दिया, उसे ओरल सेक्स के लिये उकसाया, ओबामा ने सब-कुछ लाइव देखा और एयर पोर्ट पर उसे धर दबोच लिया गया। अब दुनिया हैरान हो कि परेशान, अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था मंदी से उबरे न उबरे उससे ओबामा को क्या लेना। वो न्याय के पुजारी हैं, हनुमान भक्त हैं, महिला सशक्तीकरण के हिमायती हैं सो महिला की हित की बात करेंगे ही। अब भला हो फ्रांस की सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख व राष्ट्रपति के दावेदार स्ट्रॉस का कि इस उम्र में भी विवादित रहना चाहते हैं। पहले आइएमएफ के अफ्रीका कार्यालय में अपने अधीनस्थ कर्मचारी से यौन संबंध बनाया तो उस समय बतौर वित्त मंत्री थे, अब कुछ प्रमोशन चाहिये, राष्ट्रपति बनना चाहते हैं सो क्ंिलटन की राह पर हैं। बिल ने व्हाइट हाउस की कर्मचारी मोनिका लेविंस्की से सेक्स की बात न सिर्फ स्वीकारी बल्कि महाभियोग भी झेला। कैनेडी-मुनरो के भी खिस्से आम हैं। अब देखिये ना, इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बुर्लुस्कोनी फिलहाल एक सेक्स स्कैंडल में फंसे हैं। कम उम्र की एक बेली डांसर करीमा को अपने आलीशान मकानों में होने वाली पार्टियों में सेक्स के लिये पैसे देने के आरोप में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। अब जब, इटली हो, फ्रांस हो, अमेरिका हो सबके सब सेक्स स्कैंडल में फंसे हो। हर जगह यौन हमले हो रहे हों तो भला रूस कहां पीछे रहने वाला। वहां के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन एक कदम और आगे बढ़ाते हुये पत्नी से न सिर्फ तलाक ले ली है बल्कि पूर्व रूसी जिम्नास्ट एलिना काबाइवा को अपने पुत्र की मां भी बना डाला है। अब पूरे विश्व की बात हो जाये और भारतीय पीछे रहे ये कैसे मुमकिन। राजेश खन्ना इन दिनों लव में है। वैसे भी वे पहले अभिनेत्री अमीता की 15 साल की बेटी के साथ छेड़खानी कर चुके हैं। अपने निर्माता-निदेशक मधुर भंडारकर माडल प्रीति जैन को लीड रोल देने के बहाने यौन शोषण कर ही चुके हैं। यहां तक कि रेप व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। शाइनी आहूजा नौकरानी से दिल बहलाने लगे तो अनुपम खैर ममता कुलकर्णी की बहन को नहीं छोड़ा तो आदित्य पंचोली अपनी गर्ल फ्रेंड पूजा बेदी की नाबालिग नौकरानी को हवस का शिकार बना डाला। जैकी श्रॉफ तब्बू के साथ छेड़खानी की तो शक्ति कपूर समेत कई नामी कलाकार यौन शोषण के आरोप में नाम कमा चुके, बहुत कुछ बोल, लिख चुके हैं। ओसामा की मौत के बाद गैलप ने पूरे पाकिस्तान में एक सर्वे किया। सर्वे में सब के सब पाकिस्तानी यौन हमले से डरे हुये हैं। खासकर, एबटाबाद स्थित लादेन के ठिकाने से भारी मात्रा में पॉर्न वीडियो मिलने से पाकिस्तानी आशंका जता रहे हैं कि पांच बीवियों को खुश, संतुष्ट रखने वाला लादेन कहीं पूरे विश्व में यौन हमले तो नहीं करवाना चाहता था। महिला प्रेमी लादेन के मरने के बाद दुनिया आतंकी हमले की सोच रही हो पाकिस्तान में अर्ध सैनिक बलों के एक प्रशिक्षण केंद्र पर दो आत्मधाती हमले को उसी रूप में देख रही हो लेकिन अंदरखाने लादेन के साथी अमेरिका समेत पूरे विश्व में यौन हमला की तैयारी की योजना बना रहा हो। आखिर विवाद, सुर्खियों में रहने के लिये कुछ न कुछ तो करना ही होगा तीस मार खां की तरह।
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manoranjan thakur के द्वारा
May 19, 2011
thanks a lot anujji
abhay के द्वारा

तिरंगा आपके हैं कौन


तिरंगा आपके हैं कौन

पोस्टेड ओन: May,22 2011 जनरल डब्बा में
पहले शादी करो। फिर रिसेप्शन करो। फिर बच्चा पैदा करो और बाद में शादी करने की बात को अफवाह में उड़ा दो। रिसेप्शन के नाम पर विवाद खड़ा कर दो और बच्चा पैदा करने की बात पर खुलकर साफ कह दो- मैं गर्भवती नहीं हूं। अब आइपीएल की राजस्थान रायल्स की मालकिन मां नहीं बनना चाहती। बधाई संदेशों से वो थक गयी हैं। मगर लोग कहां मानने वाले। मां बनने का न सिर्फ इंतजार ही कर रहे हैं बल्कि यहां तक कह रहे हैं कि शिल्पा-राज कुंद्रा बच्चे के लिये कमरा भी सजा चुकी है। शिल्पा इसे अफवाह मान रही है। अब इसमें भला गलती भी तो लोगों की है। वो गर्भवती नहीं होना चाहती। अभी उनकी टीम आईपीएल में व्यस्त है और लोग उन्हें गर्भवती मान रहे हैं। अरे यह तो उनका निजी मामला है लेकिन जो पूरे देश का मसला है जिससे हर शख्स बावस्त है। जिस घटना ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया। जिसके लिये कठोर कानून बने हैं। उस बारे में क्या ख्याल है आपका। स्टार मुक्केबाज जो शादी से चंद रोज पहले अराफुरा खेलों में कांस्य पदक जीत के लौटे हैं। पूरे देश का मान बढ़ाया है दो दिन बाद ही पूरे देश को अपमानित कर दिया। रिसेप्शन कार्ड पर अशोक स्तंभ का खुलेआम न सिर्फ प्रयोग किया बल्कि उसे छोटा मसला भी मान रहे हैं। एक तो यह देश और ऊपर से इसके संविधान का भला हो कि जिस तिरंगे की आन-बान व शान के लिये लोग सरहदों पर शहीद हो जाते हैं सीने पर गोलियां खा लेते हैं। जिस तिरंगे पर नापाक हाथ बढऩे से उसे तोड़ देने की लोग कसमें खाते हैं उसी तिरंगे से बाद में शव को लपेट दिया जाता है। जिस तिरंगे को लहराकर हम अपनी जीत-विजयी होने की गाथा लिखते, गढ़ते हैं उसी तिरंगे को हम लाश में लपेट देते हैं। इतना ही नहीं किसी राजनेता के मरने के बाद हम उस तिरंगे को झुका भी देते हैं। भला यह तिरंगा झुके और हम चैन से बैठे रहें यह न जाने क्या दर्शाने की सोच है। आदमी किसी भी सूरत में तिरंगा से बड़ा नहीं हो सकता। चाहे वह जंग में खेत हुये हमारे जवान हों या खेतों में लहलहाते पौधे उगाये किसान। जय जवान-जय किसान हमारे इस विश्व विजयी तिरंगे से कीमती नहीं लेकिन लोगों ने बार-बार इसे अपमानित करने की कुत्सित करते, रचते रहे हैं। विजेंद्र सिंह ने अशोक स्तंभ रिसेप्शन कार्ड पर छाप कर खुद अपमानित महसूस कर रहे होंगे ऐसा भी नहीं है। अगर ऐसा होता तो अब तक वे सार्वजनिक रूप से देश के सामने क्षमा याचना कर चुके होते लेकिन ऐसा नहीं कर उन्होंने दूसरी गलती की है। पूरे देश को शर्म से झुका दिया है। ये वहीं विजेंद्र हैं जिन्होंने देश को कई मौके पर गौरवान्वित किया, पदक दिलाया है। बिपाशा बसु का आफर अभी भी लोगों को याद ही है कि वह स्वर्ण जीतने पर डेटिंग पर जाने के लिये विजेंद्र को न्योत चुकी है। हाल ही में विश्व कप के दौरान ठीक सेमीफाइनल मैच में भारत-पाक जंग शुरू होने से पहले आईसीसी की एक महिला अधिकारी ने तिरंगे का अपमान किया। पैरों से कुचला। देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का खून होता रहा। क्या तिरंगे का अपमान कोई भी अमन पंसद राष्ट्र भक्त देख सकता है। जानों की कुर्बानी देकर हमने देश की पहचान उसके अस्तित्व को बचाने का संकल्प दोहराते रहे हैं। हमने अभी-अभी आतंकवाद मिटाने की शपथ ली है लेकिन उसपर अमल करना नहीं सीखा है। पिछले बीस सालों में तीन दर्जन से अधिक आतंकी हमले और उनमें 1600 से अधिक लोगों की मौत पर हम उन्हें तिरंगे में लपेट चुके हैं लेकिन उस घटना के जिम्मेदार एक भी आतंकी को सजा हमने नहीं दी है। चाहे 1993 का मुंबई बम धमाका हो या 2001 का संसद पर हमला। 13 साल बाद 2006 में टाडा कोर्ट का एक फैसला आया भी तो मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। कसाब आज भी हमारे बीच खड़ा मुस्कुरा रहा है। हर 15 अगस्त को आजादी के नाम पर तिरंगे का अपमान बखूबी करना हम सीख ही चुके हैं। जिस देश का सांसद, विधायक हर दिन जेल जा रहा हो। भ्रष्टाचार के दल-दल में हम जीने की आदत डाल चुके हों। पाकिस्तान के साथ 71 की जंग में फील्ड मार्शल मानेक शॉ के साथ कुछ उच्च अधिकारियों की गलती उजागर हो रही हो। वहां राष्ट्रीयता, कर्तव्य, समर्पण की सीख देने वाला तिरंगा क्या सुरक्षित, मर्यादित रह सकेगा। अशोक स्तंभ की लाज हम नहीं रख पा रहे हैं। देश की विरासत, मर्यादा को सुरक्षित, संरक्षित रखने की जगह हम अपमान की घूंट पीने की आदी हो चुके हैं। इतना ही नहीं, जिस देश का वासी ही बार-बार घोषित-अघोषित तौर पर तिरस्कार भाव से तिरंगे को देखने की गलती दोहरा, बार-बार कर रहे हों उस देश की हालत याचक से ऊपर उठ सकेगा कहना मुश्किल। सवाल है कि जन-गण-मन गाने वाले भारतीय लोगों के विचारों में मनोविकार आया कहां से। कहीं यह मनोदशा पूरे देश की एकता को खंडित करने की साजिश सरीखे तो नहीं। आज, हर तरफ लोगों की मंशा देश को कमजोर करने की दिखती है। खेल मंत्रालय के अधिकारियों की लालफीताशाही के कारण दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा अगले साल लंदन में होने वाले ओलपिंक खेलों में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं। हम भ्रष्टाचार से लडऩे की सोच रहे हैं लेकिन हमारा आचरण भ्रष्ट हो गया है। जो मातृभूमि की हिफाजत नहीं कर सकता। जो तिरंगे, अशोक स्तंभ को सुरक्षित, मर्यादित नहीं रख सकता वो भला देश के लिये पदक जीत के भी आये तो क्या फायदा। क्या फर्क पड़ता है।
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Thakur के द्वारा
May 24, 2011
मनोरंजन जी आपका लेख सच मुच देश भक्ति की भावना से लिखा गया है परन्तु हम यह नहीं मान सकते की विजेंद्र जी जैसे खिलाडी जो भारत का नेतृत्वा करते हैं जान बुझ कर अपनी शादी क सुभ अवसर पर तिरंगे एवं रास्ट्रीय चिन्ह का अपमान करेंगे. अतः आप जैसे पत्रकारों को उनकी भावनाओ को समझते हुए छमा करना चाहिए और एस मामले को अधिक तुल नहीं देना चाहिए.
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 25, 2011
    धन्यवाद राजेशजी सही कहा भूल तो किसी से भी हो सकती है पर देश से क्षमा मांग लेने से कोई छोटा नहीं हो जायगा
alkargupta1 के द्वारा
May 24, 2011
अपने तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई !जो अपनी
मातृभूमि की रक्षा नहीं कर सकता जिसके हृदय में देश के तिरंगे के लिए कोई
सम्मान नहीं तो वह एक सच्चा भारतीय नागरिक कहलाने लायक ही नहीं है !
एक उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई ! मनोरंजन जी
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 25, 2011
    इस प्रतिक्रिया को तहे दिल से सहेज कर रखूगा बहुत धन्यवाद
संदीप कौशिक के द्वारा
May 23, 2011
मनोरंजन जी,
एक अत्यंत सार्थक बन पड़ा आलेख…लेकिन पढ़ने मात्र की औपचारिकता के लिए नहीं….बल्कि तिरंगे के लिए अपने जज़्बातों को और हवा देने के लिए…..देश के लिए अपनी भावनाओं को और सिंचित करने के लिए…..तिरंगे को हर व्यक्तिगत उपलब्धि से ऊपर रखने के लिए……!!
मंच पर रखने के लिए आपका अति-आभार !!
http://sandeepkaushik.jagranjunction.com/
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 24, 2011
    श्री संदीप भाई सही कहा तिरंगे के प्रति सोच बदल कर हम व्यक्तिगत उपलब्धि से ऊपर रखे तभी कुछ होगा सहारना के लिए धन्यवाद
Mala Srivastava के द्वारा
May 22, 2011
आपने एक लेख में कई .. और बहुतो के मन की बात कह दी !
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 23, 2011
    मालाजी आपने सराहा बहुत बहुत धन्यवाद