Sunday, May 8, 2011

40 मिनट का शोले


40 मिनट का शोले

पोस्टेड ओन: May,4 2011 जनरल डब्बा में
40 मिनट की यह एक बेहतरीन फुल ऑफ एक्शन, थ्रीलर स्क्रिप्ट है। अमेरिका ने इसे बढिय़ा सिनेमेटोग्राफी तरीके से पेश किया है। इसमें एक नायक है दूसरा सुपरहिट खलनायक। रोमांच, सस्पेंस को बनाये रखने के लिये नायिका भी है जिसे अंत में खलनायक अपनी जिंदगी बचाने के लिये मोहरा बनाता है लेकिन अंत बिल्कुल भारतीय सिनेमा स्टाइल में। खलनायक मारा जाता है और हीरो पूरे विश्व का नायक बन जाता है।मसाले से भरपूर बढिय़ा सोची-समझी सफल पटकथा तैयार की है अमेरिका ने। जिसे पूरे विश्व में एक साथ प्रसारण कर उसने साबित कर दिया कि वह जो चाहेगा, उसकी मर्जी। वो जो परोसेगा वह सच के सिवा कुछ नहीं होगा। महज सोचिये। 40 मिनट का खेल। यानी कुल 2400 सेकेंड का समय। दो हेलीकाप्टर लादेन के मकान पर मंडराते हैं। अमेरिकी सैनिक मकान के छत से नीचे उतरते हैं। मोरचा लेते हैं। लादेन के सुरक्षाकर्मियों से मुठभेड़ होती है। तीन सुरक्षाकर्मी मौत के घाट उतार दिये जाते हैं। लादेन के तीन-चार परिजन मारे जाते हैं। अंदर लादेन को पहले बंधक बनाने की कोशिश। फिर एक महिला को ढ़ाल बनाता बीमार लादेन। इसी बीच कुछ संवाद। अमेरिकी सैनिक लादेन पर गोलियां चलाते हैं। लादेन का शव पड़ा है। बाहर एक हेलीकाप्टर का तेज आवाज के साथ विस्फोट करना। पूरे पटकथा को आगे बढ़ाता। अमेरिकी सैनिक लादेन की तस्वीर लेते हैं। उधर, ओबामा जो पूरे कहानी का नायक है व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में बैठा सब कुछ लाइव देख रहा है। यानी, सैनिकों के बीच कोई एक है जो कैमरामैन की भूमिका लाइव निभा रहा है। लादेन के शव की पहचान फेशियल रिकॉग्निशन साफ्टवेयर से की जाती है जिसमें बताया जाता है कि वह 95 फीसदी लादेन ही है। इसके बाद शव का डीएनए टेस्ट होता है। फिर, उस सैनिकों में से कोई एक चिकित्सक की भूमिका सरीखे में है। डीएनए का सेम्पुल अमेरिका पहुंचता है। लादेन की बहन की डीएनए से उसकी मैच करायी जाती है और तब कहा जाता है जेरोनिमो ईकेआईए। यानी लादेन मारा जाता है। इसकी पुष्टि होती है। अमेरिकी सैनिक लादेन के शव को ले जाने की तैयारी करते हैं। हेलीकाप्टर आता है। उसपर लादेन के शव को लादा जा रहा है। अंतिम क्रिया के लिये लादेन के शव को नहलाया जा रहा है। सफेद कपड़े में लपेटकर उसे अमेरिकी अधिकारी द्वारा तैयार धार्मिक पंक्तियों जिसे एक स्थानीय वक्ता ने अरबी में अनुवाद किया था, का पाठ कर एक पटरी समुद्र में उतरता है जिसपर लादेन का शव है। यह सब महज 40 मिनट में। यह सुपरहिट स्क्रिप्ट तैयार किया था ओबामा के सलीम-जावेद ने जिसे आज पूरे विश्व में सराहना हो रही है। लादेन के मरने का पूरा तामझाम प्रचार के साथ दुनिया के टेलीविजनों पर प्रसारण चल रहा है। अमेरिका खुद की पीठ थपथपाता भले ही नजर आ रहा हो लेकिन दर्शकों को इसकी दादागिरी पच, हजम नहीं हो रही। आखिर माना कि वह सर्वशक्तिमान है। उन्नत तकनीक से वह लैस है। लेकिन समय की रफ्तार को पकडऩे की हिम्मत, थामने की ताकत उसके पास न था न कभी होगा। उसने 40 मिनट की एक कहानी बना ली आपरेशन लादेन। क्या 40 मिनट में यह सब कुछ संभव है? सोचिये, ओबामा प्रशासन को पहले से ही भान था कि वह मुसलमानों की नाराजगी झेल सकता है। जिंदा पकड़कर लादेन को वह बड़ी मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता था। मुठभेड़ में मौत दिखला नहीं सकता था। कारण, जो लादेन वर्षों से डायलिसिस पर पड़ा हो वह भला बंदूक क्या थामता। लिहाजा, एक महिला को सामने लाकर उसे लादेन की नायिका यानी बीवी बताकर अमेरिका ने एक चाल चली। जो अमेरिका शक्ति से भरपूर शक्तिशाली है। जिसे विश्व मानवाधिकार की चिंता नहीं। दूसरे यानी पाक की संप्रभुता की जिसे परवाह नहीं। जो कानून को तोडऩा जानता हो। उसके सामने कमजोर, लाचार चारों ओर से सैनिकों से घिरे लादेन की बीवी क्या चीज थी जिसे दूर पटका नहीं जा सका और लादेन को जिंदा पकड़कर विश्व के सामने लाने की अमेरिका जोखिम नहीं उठा सका। साफ है, यह तो स्क्रिप्ट का हिस्सा था नहीं। पटकथा के मुताबिक पूरा पाक शांति की आगोश में सोया रहेगा और खलनायक के सिर में गोली मार दी जायेगी। कहीं ऐसा तो नहीं कि लादेन पहले ही मारा जा चुका हो और अमेरिका उसे एक मई को घोषित कर रहा हो, कारण एक मई की तारीख अमेरिका ने दुश्मनों के लिये मुकर्रर कर रखी है। अब तक अमेरिका कई सुपरहिट कारनामें एक मई को कर चुका है। उसका असली दुश्मन हिटलर भी उसी दिन मारा गया था। एक प्रश्न, आखिर लादेन कितनी बार मरेगा। इससे पहले भी वह मारा जा चुका है। पाक ने इसकी पुष्टि भी की है। आज उसी पाक को लोग आतंकी पोषक के रूप में देख रहे हैं। सोचनीय है कि पाक अमेरिका के हाथों गिरवी है। अमेरिकी कर्ज में आकंठ उसके पास बोलने के लिये शब्द कहां से आये। वह मौन खड़ा है। जरदारी, रहमानी सबके सब चुप, खामोश हैं। भला इस स्क्रिप्ट में उन्हें जो भूमिका निर्माता, निर्देशक ने तय की है उसे वो दोनों निभा रहे हैं। अब पाक को मौत की सजा मिले या रहम की फिर भीख वो सब कुछ कबूल करेगा। सोचने का काम तो भारत के जिम्मे हैं। एक कसाब को पाल ही रखा है और भी कोई जख्म मिले उसे भी वह सह लेगा खुशी-खुशी अपनों की जान गंवाकर।
Rate this Article:
3 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 53 votes, average: 5.00 out of 5 (3 votes, average: 5.00 out of 5, rated)
16 प्रतिक्रिया
  • SocialTwist Tell-a-Friend
Similar articles : No post found
Post a Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद काशीवासी के द्वारा
May 5, 2011
मनोरंजन जी,
यह पूरा विषय शुरुआत से ही विवादित और विवादास्पद रहा है और उसका कोई अंत होता यहाँ भी नहीं दिख रहा|देश के आक्रमणकारियों को दण्ड दिलाने की आपकी अंतिम चार पंक्तियों से मैं पूरी तरह से इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ| इस देश की राजनीति, कूटनीति के साथ ही संविधान में भी परिवर्तन किये जाने की आवश्यकता है|
साभार,
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 5, 2011
    श्री वहिदजी सही कहा है संविधान में भी परिवर्तन किये जाने की आवश्यकता है| धन्यवाद
subrat के द्वारा
May 4, 2011
very intresting post
lot of thanks
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 4, 2011
    thanks for comment
Aditi के द्वारा
May 4, 2011
bahut hi sarahniya aalekh
thanks
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 4, 2011
    बहुत थैंक्स
sonali के द्वारा
May 4, 2011
मनोरंजंजी
लेखनी मे बहुत दम है
सुभकामना
ritesh के द्वारा
May 4, 2011
बहुत सटीक लिखा है बधाई
baijnathpandey के द्वारा
May 4, 2011
आदरणीय श्री मनोरंजन जी
आपकी ये ४० मिनट की शोले हमें तो बहुत पसंद आई |
बढ़िया आलेख | बधाई |
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 4, 2011
    श्री पांडेयजी रचना पसंद आने के लिय धन्यवाद
rahulpriyadarshi के द्वारा
May 4, 2011
पाक तो पाक ही है,उससे क्या उम्मीद करनी,अमेरिका भी कुछ कम नहीं है,किन्तु जो भी हो दुर्दांत मारा गया,यह भरोसा हुआ की आतंकवाद का अंत तय है,उम्मीद है हमारे भाग्य-विधाता भी इससे सार्थक सीख लेंगे और अपराधियों के प्रत्यर्पण की भीख मांगना पाकिस्तान से अब बंद करेंगे,बहुत ही अच्छी पोस्ट,धन्यवाद.
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 4, 2011
    श्री राहुल जी सही कहा है आप ने सुक्रिया
abodhbaalak के द्वारा
May 4, 2011
भय्या आपने तो ऐसे ज़बरदस्त स्टोरी लिख डाली की , …..
सच कहा आपने की ४० मं में सब खेल ख़त्म पर क्या सच में ….
सराहनीय रचना …
http://abodhbaalak.jagranjunction.com/
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 4, 2011
    श्री अबोध्जी ४० मिनट को सराहने के लिय धन्यवाद
abhay के द्वारा
May 4, 2011
sahi kaha hai ye chalish minute me nahi ho sak tha
    manoranjan thakur के द्वारा
    May 4, 2011
    thanks

रातों रात स्टार कफन चोर

रातों रात स्टार कफन चोर

पोस्टेड ओन: April,21 2011 जनरल डब्बा में
मनसुख जी, आपकी तरह देश भक्त की डिग्री मिल जाती तो बहुत मेहरबानी होती। मान्यता मिलने के बाद तनसुख भी कुछ बोलता। तनसुख को डिग्री दिलवा दीजिये प्लीज। उसके कैरियर का सवाल है। वैसे आप बहुत बड़े विचारक हैं। गांधीवादी, समाजवादी हैं। आपको रातों-रात डिग्री मिल गयी। तनसुख ठहरा कमबख्त मूरख। लेकिन आप पैरवी करेंगे तो आज कल लोकतंत्र में अगूंठे छाप लीडरों की ही तो चलती, बनती है। वह भी मेहनत करेगा। नहीं तो रातों रात वो आपकी तरह नेता नहीं बन सकेगा। तनसुख ने अपने बायोडाटा में भी लिखा है। उसे डिग्री मिल जायेगी तो वो भी कुछ बोलेगा। आपने गुजरात व बिहार के ग्राम सुधार को सराहा, अनुकरणीय ठहराया है। तनसुख बिहार से अभी-अभी लौट के आया है। खासकर ग्रामीण परिवेश से। वह बहुत दु:खी है। वहां मुख्य सड़कों के किनारे बेशर्मी की हद है। महिलायें व बच्चे खुले में शौच करते हैं खुलेआम। उस मुख्य सड़क से पैदल तो दूर वाहनों से भी गुजरना बदबू के कारण असहनीय है। कहने पर महिलायें व बच्चे काटने को दौड़ते हैं। गाली-गलौच करने पर उतारू हो जाते हैं। तनसुख वह सब भोग के आया है। तनसुख ने कुछ बोला ही था कि उसका स्वागत नव-नव गालियों से हुआ। बच्चे व महिलाओं ने मुंह नोंच लिये। मनसुख जी माफ कीजियेगा। ग्राम सुधार पर तो तनसुख कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। वंशवाद पर अपने योग गुरु भड़क उठे हैं। उनका भड़कना स्वभाविक है। कल तलक भ्रष्टाचार के खिलाफ वही लोम-विलोम करवा रहे थे। अचानक आप कपालभाती करवाने लगे। 97 घंटे में 44 लाख फोलोवर। आपके मंच पर भी वे टोह लेने गये। आपको लगा वे आपके प्रशंसक, समर्थक हैं लेकिन ये देश ही ऐसा है मनसुख जी। यहां कोई किसी का प्रशंसक नहीं होता। आप भी गच्चा खा गये। बाप-बेटे के मोहपाश में उन्हें वंशवाद की बू आने लगी। इसके बाद भी आप डटे हैं। आपको लग रहा है कि जनपाल लागू हो जायेगा। नहीं होगा तो फिर आप जनता को फिर भड़कायेंगे लेकिन इस बार भड़कना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है। माफ कीजियेगा। ऐसे में तनसुख वंशवाद पर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं। बस हर वक्त डिग्री की रट लगाये बैठा है। एक डिग्री तनसुख को भी दे दीजिये। आपका अपना तनसुख दिल पर हाथ रखकर कहेगा आल इज वेल। पूरा चमचा है आपका। वैसे भी आपके 44 लाख प्रशंसक दिल पर हाथ रखकर कहेंगे क्या कि आल इज वेल। शायद नहीं। बईमान से बईमान आदमी भी देश की तरक्की चाहता है।
तीन थे भाई। तीनों जेड श्रेणी के बईमान। तीनों ने सोचा। अलग-अलग रहेंगे समाज कमजोर कर देगा। साथ रहकर बईमानी करेंगे पूरा देश अपना। तरक्की ही तरक्की। सो, तीनों ने एक ही लड़की से शादी भी करने की सोची। तीनों ने बईमानी से शादी कर ली। नौवें महीने बईमानी ने एक सुंदर पुत्र को पैदा किया। पुत्र जन्म लेते ही ठहाका मार कर हंस पड़ा। तीनों भाई हतप्रभ। इसको तो अभी रोना चाहिये और ये हंस रहा है। बेटे ने बापों की करतूतें जान ली। कहा-तुम तीनों को बाप कहते मुझे शर्म आती है। अरे बईमानों बईमानी भी करते हो तो घटिया किस्म का। मुझे देखना। बेटा बड़ा होकर कफन चोर निकला। शमशान से मुर्दों की कफन उठा लाता। उस कफन चोर का नाम पूरे कस्बे में फैल गया। धीरे-धीरे उस नगर का नाम ही कफन चोर पड़ गया। उस नगर में रहने वाले शर्म से पानी-पानी हो रहे थे। वो कफन चोर बूढ़ा हो चला। अपने तीन लड़कों को उसने बुलाकर कहा-बेटा। जिंदगी भर मैंने गलत काम किये। बईमानी की। तुम लोगों से एक आग्रह है। मेरे मरने के बाद कोई ऐसा काम करना जिससे मेरा नाम गर्व से ऊपर, रोशन हो उठे। बाप के मरने के बाद तीनों भाई सोच में पड़ गये। क्या किया जाये जिससे बाप का नाम रोशन हो सके। छोटू ने कहा- भाई लोग आप नाहक में परेशान हो रहे हैं मेरे पास एक झटका आइडिया है। क्या है-दोनों भाई ने उत्सुकता से पूछा। छोटू ने कहा-कल सुबह खुद देख लेना। अहले सुबह गांव में हंगामा हो गया। एक आदमी की मौत बीती रात हो गयी थी। परिजन उसके शव को शमशान में दफना के आ गये थे। सुबह-सुबह उसी का शव उसके दरवाजे के बाहर पड़ा था। यही सिलसिला चल पड़ा। हर दिन कोई मरता दूसरे दिन उसकी लाश उसके घर के बाहर पड़ी मिलती। अब तो चारों ओर सबके सब कहने लगे इससे तो बढिय़ा उसका बाप था बेचारा कफन चोर। तीनों भाई खुश थे। बाप का नाम रोशन कर सब पुत्र होने का फर्ज निभा रहे थे। कहानी सुनाने का मतलब मनसुख जी आप समझ ही रहे होंगे। रातों-रात स्टार बना दीजिये। जैसे आप बने और वो कफन चोर का बेटा बना। सबके साथ तनसुख भी रातों-रात स्टार बनेगा। कुछ बोलेगा। उसका बायोडाटा देखिये। उससे योग्य कोई दूसरा कहां। मनसुख जी आपको सोनिया मैडम ने अधीर नहीं होने की सलाह दी है। आपकी उम्र अब वो नहीं है कि इस नाचीज देश के लिये सख्त पत्र लिखे। देखिये मैडम को, पत्र का जवाब शालीन भाषा में देकर उसने आपके आंदोलन के औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। इससे पहले भी वो आपको चित कर चुकी है। भला तनसुख से ये सब कैसे देखा जायेगा। मेरा बायोडाटा देखिये। बतौर शपथ पत्र बायोडाटा में मैंने लिखा है। निजी व सामाजिक चरित्र मेरा एक होगा। देश में अव्यवस्था, कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार, नजराना, हर्जाना, शुक्राना और पतन के लिये यह व्यवस्था या नेता जिम्मेदार नहीं होंगे। हम भी देश के नागरिक हैं। हमारा जीवन दोहरे मापदंडों से अब नहीं भरा रहेगा। ताकतवर के सामने शुक्राना, समर्पण-दंडवत, नतमस्तक और कमजोर, शोषित व प्रताडि़त के सामने बाघ। कानून नहीं मानने वाले कथनी व बातों में आदर्श झाडऩे वाले, करनी में ठीक विपरीत, उलटा, ये दोहरा चारित्रिक गुण नहीं चलेगा। हमारा दिल विशाल भारत की तरह दयालु होना चाहिये जो खुद अंधेरे में रहकर भी इस्लामाबाद को बिजली देने का न्योता देता हो। मैं कोई गांधी नहीं हूं मनसुख जी। आम आदमी हूं। मेरा एक हाथ रिक्शा खींचता है तो दूसरा खेतों में कुदाल चलाता है। मेरे एक पांव पगडंडियों पर चलते हैं तो दूसरा चिकनी सड़कों पर उड़ता है। मेरे एक आंख गंदगियों को निहारता है तो दूसरा सौंदर्य को सराहता है। मैं एक नाक से विषाक्त हवा तो दूसरे से खुशबू का आनंद ले रहा हूं। मेरे एक कान संतुष्टों, ईमानदार लोगों के शांत विचारों से रसास्वादित हो रहे हैं तो दूसरे से मुझे बईमानी, हत्या, चोरी, डकैती, बलात्कार के चीखें सुनाई पड़ रही है। मेरा मस्तिष्क द्वंद्व में है। दुविधा में है। वो भ्रष्टाचार इस अराजक माहौल के खिलाफ जंग छेडऩा चाहते हैं लेकिन मेरे अंग मेरे साथ नहीं हैं। मुझसे यह अराजकता, आर्थिक अवनति, भ्रष्टाचार की ओर तेजी से लुढ़कता देश देखा नहीं जा रहा है। बस, एक बार गांधीवादी, राष्ट्रवादी, समाजवादी की डिग्री दिला दीजिये फिर देखिये रातों रात।
Rate this Article:
4 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 5 (4 votes, average: 4.50 out of 5, rated)
1 प्रतिक्रिया
  • SocialTwist Tell-a-Friend
Similar articles : No post found
Post a Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ritesh के द्वारा
April 24, 2011
 देश मे इस जैसा कफ़न चोर की कोई कमी नहीं है अन्ना को आप ने सही नसीहत दी है
बधाई आप को

रातों रात स्टार कफन चोर

पोस्टेड ओन: April,21 2011 जनरल डब्बा में
मनसुख जी, आपकी तरह देश भक्त की डिग्री मिल जाती तो बहुत मेहरबानी होती। मान्यता मिलने के बाद तनसुख भी कुछ बोलता। तनसुख को डिग्री दिलवा दीजिये प्लीज। उसके कैरियर का सवाल है। वैसे आप बहुत बड़े विचारक हैं। गांधीवादी, समाजवादी हैं। आपको रातों-रात डिग्री मिल गयी। तनसुख ठहरा कमबख्त मूरख। लेकिन आप पैरवी करेंगे तो आज कल लोकतंत्र में अगूंठे छाप लीडरों की ही तो चलती, बनती है। वह भी मेहनत करेगा। नहीं तो रातों रात वो आपकी तरह नेता नहीं बन सकेगा। तनसुख ने अपने बायोडाटा में भी लिखा है। उसे डिग्री मिल जायेगी तो वो भी कुछ बोलेगा। आपने गुजरात व बिहार के ग्राम सुधार को सराहा, अनुकरणीय ठहराया है। तनसुख बिहार से अभी-अभी लौट के आया है। खासकर ग्रामीण परिवेश से। वह बहुत दु:खी है। वहां मुख्य सड़कों के किनारे बेशर्मी की हद है। महिलायें व बच्चे खुले में शौच करते हैं खुलेआम। उस मुख्य सड़क से पैदल तो दूर वाहनों से भी गुजरना बदबू के कारण असहनीय है। कहने पर महिलायें व बच्चे काटने को दौड़ते हैं। गाली-गलौच करने पर उतारू हो जाते हैं। तनसुख वह सब भोग के आया है। तनसुख ने कुछ बोला ही था कि उसका स्वागत नव-नव गालियों से हुआ। बच्चे व महिलाओं ने मुंह नोंच लिये। मनसुख जी माफ कीजियेगा। ग्राम सुधार पर तो तनसुख कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। वंशवाद पर अपने योग गुरु भड़क उठे हैं। उनका भड़कना स्वभाविक है। कल तलक भ्रष्टाचार के खिलाफ वही लोम-विलोम करवा रहे थे। अचानक आप कपालभाती करवाने लगे। 97 घंटे में 44 लाख फोलोवर। आपके मंच पर भी वे टोह लेने गये। आपको लगा वे आपके प्रशंसक, समर्थक हैं लेकिन ये देश ही ऐसा है मनसुख जी। यहां कोई किसी का प्रशंसक नहीं होता। आप भी गच्चा खा गये। बाप-बेटे के मोहपाश में उन्हें वंशवाद की बू आने लगी। इसके बाद भी आप डटे हैं। आपको लग रहा है कि जनपाल लागू हो जायेगा। नहीं होगा तो फिर आप जनता को फिर भड़कायेंगे लेकिन इस बार भड़कना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है। माफ कीजियेगा। ऐसे में तनसुख वंशवाद पर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं। बस हर वक्त डिग्री की रट लगाये बैठा है। एक डिग्री तनसुख को भी दे दीजिये। आपका अपना तनसुख दिल पर हाथ रखकर कहेगा आल इज वेल। पूरा चमचा है आपका। वैसे भी आपके 44 लाख प्रशंसक दिल पर हाथ रखकर कहेंगे क्या कि आल इज वेल। शायद नहीं। बईमान से बईमान आदमी भी देश की तरक्की चाहता है।
तीन थे भाई। तीनों जेड श्रेणी के बईमान। तीनों ने सोचा। अलग-अलग रहेंगे समाज कमजोर कर देगा। साथ रहकर बईमानी करेंगे पूरा देश अपना। तरक्की ही तरक्की। सो, तीनों ने एक ही लड़की से शादी भी करने की सोची। तीनों ने बईमानी से शादी कर ली। नौवें महीने बईमानी ने एक सुंदर पुत्र को पैदा किया। पुत्र जन्म लेते ही ठहाका मार कर हंस पड़ा। तीनों भाई हतप्रभ। इसको तो अभी रोना चाहिये और ये हंस रहा है। बेटे ने बापों की करतूतें जान ली। कहा-तुम तीनों को बाप कहते मुझे शर्म आती है। अरे बईमानों बईमानी भी करते हो तो घटिया किस्म का। मुझे देखना। बेटा बड़ा होकर कफन चोर निकला। शमशान से मुर्दों की कफन उठा लाता। उस कफन चोर का नाम पूरे कस्बे में फैल गया। धीरे-धीरे उस नगर का नाम ही कफन चोर पड़ गया। उस नगर में रहने वाले शर्म से पानी-पानी हो रहे थे। वो कफन चोर बूढ़ा हो चला। अपने तीन लड़कों को उसने बुलाकर कहा-बेटा। जिंदगी भर मैंने गलत काम किये। बईमानी की। तुम लोगों से एक आग्रह है। मेरे मरने के बाद कोई ऐसा काम करना जिससे मेरा नाम गर्व से ऊपर, रोशन हो उठे। बाप के मरने के बाद तीनों भाई सोच में पड़ गये। क्या किया जाये जिससे बाप का नाम रोशन हो सके। छोटू ने कहा- भाई लोग आप नाहक में परेशान हो रहे हैं मेरे पास एक झटका आइडिया है। क्या है-दोनों भाई ने उत्सुकता से पूछा। छोटू ने कहा-कल सुबह खुद देख लेना। अहले सुबह गांव में हंगामा हो गया। एक आदमी की मौत बीती रात हो गयी थी। परिजन उसके शव को शमशान में दफना के आ गये थे। सुबह-सुबह उसी का शव उसके दरवाजे के बाहर पड़ा था। यही सिलसिला चल पड़ा। हर दिन कोई मरता दूसरे दिन उसकी लाश उसके घर के बाहर पड़ी मिलती। अब तो चारों ओर सबके सब कहने लगे इससे तो बढिय़ा उसका बाप था बेचारा कफन चोर। तीनों भाई खुश थे। बाप का नाम रोशन कर सब पुत्र होने का फर्ज निभा रहे थे। कहानी सुनाने का मतलब मनसुख जी आप समझ ही रहे होंगे। रातों-रात स्टार बना दीजिये। जैसे आप बने और वो कफन चोर का बेटा बना। सबके साथ तनसुख भी रातों-रात स्टार बनेगा। कुछ बोलेगा। उसका बायोडाटा देखिये। उससे योग्य कोई दूसरा कहां। मनसुख जी आपको सोनिया मैडम ने अधीर नहीं होने की सलाह दी है। आपकी उम्र अब वो नहीं है कि इस नाचीज देश के लिये सख्त पत्र लिखे। देखिये मैडम को, पत्र का जवाब शालीन भाषा में देकर उसने आपके आंदोलन के औचित्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। इससे पहले भी वो आपको चित कर चुकी है। भला तनसुख से ये सब कैसे देखा जायेगा। मेरा बायोडाटा देखिये। बतौर शपथ पत्र बायोडाटा में मैंने लिखा है। निजी व सामाजिक चरित्र मेरा एक होगा। देश में अव्यवस्था, कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, अनाचार, दुराचार, नजराना, हर्जाना, शुक्राना और पतन के लिये यह व्यवस्था या नेता जिम्मेदार नहीं होंगे। हम भी देश के नागरिक हैं। हमारा जीवन दोहरे मापदंडों से अब नहीं भरा रहेगा। ताकतवर के सामने शुक्राना, समर्पण-दंडवत, नतमस्तक और कमजोर, शोषित व प्रताडि़त के सामने बाघ। कानून नहीं मानने वाले कथनी व बातों में आदर्श झाडऩे वाले, करनी में ठीक विपरीत, उलटा, ये दोहरा चारित्रिक गुण नहीं चलेगा। हमारा दिल विशाल भारत की तरह दयालु होना चाहिये जो खुद अंधेरे में रहकर भी इस्लामाबाद को बिजली देने का न्योता देता हो। मैं कोई गांधी नहीं हूं मनसुख जी। आम आदमी हूं। मेरा एक हाथ रिक्शा खींचता है तो दूसरा खेतों में कुदाल चलाता है। मेरे एक पांव पगडंडियों पर चलते हैं तो दूसरा चिकनी सड़कों पर उड़ता है। मेरे एक आंख गंदगियों को निहारता है तो दूसरा सौंदर्य को सराहता है। मैं एक नाक से विषाक्त हवा तो दूसरे से खुशबू का आनंद ले रहा हूं। मेरे एक कान संतुष्टों, ईमानदार लोगों के शांत विचारों से रसास्वादित हो रहे हैं तो दूसरे से मुझे बईमानी, हत्या, चोरी, डकैती, बलात्कार के चीखें सुनाई पड़ रही है। मेरा मस्तिष्क द्वंद्व में है। दुविधा में है। वो भ्रष्टाचार इस अराजक माहौल के खिलाफ जंग छेडऩा चाहते हैं लेकिन मेरे अंग मेरे साथ नहीं हैं। मुझसे यह अराजकता, आर्थिक अवनति, भ्रष्टाचार की ओर तेजी से लुढ़कता देश देखा नहीं जा रहा है। बस, एक बार गांधीवादी, राष्ट्रवादी, समाजवादी की डिग्री दिला दीजिये फिर देखिये रातों रात।
Rate this Article:
4 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 54 votes, average: 4.50 out of 5 (4 votes, average: 4.50 out of 5, rated)
1 प्रतिक्रिया
  • SocialTwist Tell-a-Friend
Similar articles : No post found
Post a Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ritesh के द्वारा
April 24, 2011
 देश मे इस जैसा कफ़न चोर की कोई कमी नहीं है अन्ना को आप ने सही नसीहत दी है
बधाई आप को